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12वीं बोर्ड पेपर लीक कांड: PTI शिक्षक ने 3000 रुपये में बेचा प्रश्न पत्र, जांच में बड़ा खुलासा | रायपुर

छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड हिंदी परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रायपुर कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है कि बेमेतरा जिले के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ PTI शिक्षक ने कथित तौर पर हाथ से लिखकर तैयार किया गया प्रश्न पत्र एक NSUI नेता को मात्र 3000 रुपये में उपलब्ध कराया। इस मामले में पुलिस ने PTI शिक्षक जवाहर लाल और विकास सेन को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मास्टरमाइंड के रूप में NSUI नेता वेणु कुमार जंघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि लीक किया गया प्रश्न पत्र आगे टेलीग्राम और सोशल मीडिया के जरिए हजारों छात्रों तक पहुंच गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में कई स्तरों पर लापरवाही और संभावित मिलीभगत हो सकती है। इसी आधार पर अब बेमेतरा जिले के परीक्षा केंद्र प्रभारी और एग्जाम कंट्रोलर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस के अनुसार 13 मार्च की रात टेलीग्राम पर प्रश्न पत्र की तस्वीर वायरल हुई थी, जो परीक्षा से लगभग 10 घंटे पहले छात्रों तक पहुंच गई थी। इसे बड़ी संख्या में लोगों ने डाउनलोड और शेयर किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर NSUI का CM हाउस घेराव आज, बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने जताया समर्थन

रायपुर में छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर आज 7 मई को NSUI शाम 4 बजे मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं ने अपनी राय रखी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही छात्र संघ चुनाव के समर्थन में नजर आए, हालांकि चुनाव नहीं होने को लेकर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर सवाल भी उठाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि छात्र संघ चुनाव नेतृत्व तैयार करने की पहली पाठशाला होते हैं। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में होने वाले चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संगठन क्षमता और प्रशासनिक समझ विकसित करने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के कई बड़े नेता छात्र राजनीति से निकलकर आगे आए हैं। कांग्रेस शासनकाल में चुनाव नहीं होने के सवाल पर प्रमोद दुबे ने कहा कि सरकार तैयार थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता मृत्युंजय दुबे ने भी छात्र संघ चुनाव को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में छात्रों की समस्याओं को निर्वाचित प्रतिनिधि बेहतर तरीके से प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। उनके अनुसार 18 साल का युवा जब देश के जनप्रतिनिधि चुन सकता है, तो उसे अपने कॉलेज में भी प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि मृत्युंजय दुबे ने कांग्रेस और NSUI पर सवाल उठाते हुए कहा कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी चुनाव बंद रहे, तब संगठन ने इस मुद्दे पर ज्यादा आवाज नहीं उठाई। भाजयुमो के पूर्व प्रदेश मंत्री और PTRSU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रखर मिश्रा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव गरीब और मध्यमवर्गीय युवाओं को राजनीति में आगे आने का मौका देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र राजनीति में ABVP के प्रभाव के कारण अब NSUI चुनाव की मांग को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। इस पर पलटवार करते हुए NSUI जिलाध्यक्ष शांतनु झा ने कहा कि 2019 से 2022 तक कोरोना महामारी के चलते छात्र संगठन चुनाव नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस सरकार दोबारा बनती, तो चुनाव जरूर कराए जाते। उन्होंने कहा कि NSUI लगातार छात्र हित में आंदोलन कर रही है और अब भी चुनाव कराने की मांग पर अड़ी हुई है।

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