नान घोटाला केस: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को जमानत, 7 दिसंबर को ED पेश करेगी चार्जशीट
छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला मामले में रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को राहत मिली है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी है। दोनों अधिकारियों ने 22 सितंबर को ईडी (ED) कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उन्हें 16 अक्टूबर तक ED की कस्टडी में भेजा था। रिमांड अवधि खत्म होने पर दोनों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जमानत मिल गई। अब 7 दिसंबर को ED (प्रवर्तन निदेशालय) इस मामले में चार्जशीट पेश करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। ED ने दिल्ली में की थी पूछताछ सरेंडर से पहले दोनों अफसर करीब 5 दिन तक ED कोर्ट के चक्कर लगाते रहे। आखिरकार उन्होंने अधिकारियों की मौजूदगी में कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद ED ने उन्हें दिल्ली मुख्यालय ले जाकर पूछताछ की थी। क्या है नान घोटाला? यह मामला नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) में चावल, नमक और अन्य खाद्य सामग्री के परिवहन और भंडारण में भारी गड़बड़ी से जुड़ा है। 12 फरवरी 2015 को ACB और EOW की टीमों ने नान मुख्यालय रायपुर सहित 28 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई में करीब 1.75 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए, जबकि कुल 3.50 करोड़ रुपए की जब्ती हुई। टीमों ने कई अहम दस्तावेज भी कब्जे में लिए। जांच पूरी होने के बाद नान के तत्कालीन मैनेजर समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। बाद में केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था? ED ने हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। एजेंसी ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुनवाई के बाद जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए ED को दोनों अधिकारियों की कस्टडी लेने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें 4 हफ्ते ED की हिरासत में रहना होगा, उसके बाद ही जमानत दी जा सकेगी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए — IAS आलोक शुक्ला की भूमिका IAS आलोक शुक्ला डॉक्टर से अफसर बने अधिकारी हैं। 2015 में जब नान घोटाले का खुलासा हुआ, उस समय वे खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव थे, जबकि अनिल टुटेजा नान के MD के पद पर थे। दोनों पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

