21 करोड़ की फोरेंसिक वैन खड़ी, जांच ठप: जिलों में न पहुंचने से रायपुर लैब पर बढ़ा दबाव

राज्य में अपराध जांच को आधुनिक और तेज बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 21.35 करोड़ रुपए खर्च कर 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदीं, लेकिन खरीदी के करीब चार महीने बाद भी ये वाहन जिलों तक नहीं पहुंच पाए हैं और अमलेश्वर में खड़े हैं। इसका सीधा असर जांच प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसी केस की फोरेंसिक रिपोर्ट 2-3 दिनों में मिल जाती थी, अब वही रिपोर्ट आने में 3 से 4 हफ्ते लग रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के किसी भी जिले में गंभीर अपराध होने पर अब भी सैंपल जांच के लिए रायपुर की फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं, जिससे वहां काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के नए बीएनएस कानून के तहत गंभीर मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने के बावजूद संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। रायपुर की हाईटेक लैब में डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य, हथियार, विस्फोटक और विभिन्न जैविक नमूनों की जांच की जा रही है, लेकिन पूरे राज्य का भार एक ही जगह होने से प्रक्रिया धीमी हो गई है। वहीं, मोबाइल फोरेंसिक वैन का मुख्य उद्देश्य यही था कि घटनास्थल पर ही साक्ष्य एकत्र कर उनकी प्राथमिक जांच की जा सके। इन वैन के जरिए मौके पर ही फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग, सीन स्केच और साक्ष्यों की सुरक्षित पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होता। हालांकि विभाग का कहना है कि वाहनों को जिलों में भेजने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर इन्हें रवाना कर दिया जाएगा, जिसके बाद जांच व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

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