Mayor Meenal Chaubey

तेलीबांधा तालाब पर पार्किंग शुल्क को लेकर निगम का यू-टर्न

महापौर मीनल चौबे बोलीं– फिलहाल नहीं वसूला जाएगा चार्ज, चर्चा के बाद होगा अंतिम फैसला रायपुर के तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) पर पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बाद नगर निगम ने फिलहाल अपने फैसले पर रोक लगा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क पर पार्किंग शुल्क दर्शाने वाले बोर्ड लगाए जाने के बाद आम लोगों में भ्रम और नाराजगी देखी गई थी।इस पूरे मामले पर एक फरवरी की शाम महापौर मीनल चौबे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि, अभी तालाब किनारे किसी भी प्रकार का पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। महापौर ने माना कि सड़क पर खड़े वाहनों से शुल्क वसूलना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के पास तेलीबांधा तालाब के आसपास ऐसी कोई चिन्हित पार्किंग जगह नहीं है, जहां वाहनों को सुव्यवस्थित ढंग से खड़ा कराया जा सके। इसी वजह से अगले करीब 15 दिनों तक तालाब क्षेत्र में आने-जाने वालों और वाहनों की निगरानी की जाएगी। अव्यवस्था पर नियंत्रण यातायात पुलिस के हाथ महापौर मीनल चौबे ने यह भी बताया कि तालाब के दूसरी ओर सड़क किनारे कई बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। वहां आने वाले लोग अपने वाहन तालाब की ओर खड़े कर देते हैं, जिससे अव्यवस्था पैदा होती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर पार्किंग और यातायात व्यवस्था का अधिकार नगर निगम के बजाय यातायात पुलिस के पास है। इस मुद्दे पर निगम, यातायात समिति और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा। पहले भी उठ चुका है पार्किंग का मुद्दा महापौर ने बताया कि वर्ष 2021-22 में भी तेलीबांधा तालाब किनारे पार्किंग व्यवस्था को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उस समय कई विसंगतियों के चलते भाजपा संगठन और पार्षद दल ने ही इसका विरोध किया था।उन्होंने कहा कि वर्तमान निर्णय राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 के संकल्प के आधार पर लिया गया था, जिसमें पार्किंग शुल्क की दरें तय थीं। उसी आधार पर व्यवस्था लागू करने की कोशिश की गई। यातायात समिति से राय नहीं लेने का आरोप इधर, कांग्रेस और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पार्किंग शुल्क तय करने से पहले यातायात समिति से कोई चर्चा नहीं की गई। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे ने कहा कि बिना प्रक्रिया अपनाए सीधे बोर्ड लगाकर शुल्क घोषित करना गलत है और इससे जनता में भ्रम फैला। कांग्रेस का विरोध, निजीकरण का आरोप तेलीबांधा मरीन ड्राइव के कथित व्यवसायीकरण के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को जनविरोधी बताया।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जीई रोड शहर का प्रमुख सार्वजनिक मार्ग है और यहां पार्किंग ठेका देना नियमों के विपरीत है। उनका आरोप है कि वर्षों से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के लिए इस्तेमाल होने वाले इस सार्वजनिक स्थल को व्यावसायिक हितों के हवाले किया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन समेत अन्य नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पार्किंग शुल्क का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जबरन वसूली रोकने की मांग कांग्रेस ने मरीन ड्राइव में कथित जबरन पार्किंग शुल्क वसूली पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, रायपुर सांसद और शहर के चारों विधायकों को पत्र भेजा है।पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब पर्याप्त पार्किंग सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, तो शुल्क वसूली किस आधार पर की जा रही थी।

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रायपुर: शहर के किसी भी मंदिर से नहीं लिया जाएगा संपत्तिकर, ब्राम्हणपारा मंदिर में नोटिस देने वाले कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

रायपुर नगर निगम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब शहर के किसी भी मंदिर से संपत्तिकर (प्रॉपर्टी टैक्स) नहीं लिया जाएगा। महापौर मीनल चौबे ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि निगम क्षेत्र के सभी जोन और वार्डों में स्थित मंदिरों पर प्रॉपर्टी टैक्स लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थान समाज की आस्था के केंद्र हैं और उन पर कर लगाना उचित नहीं है। इसके बावजूद जोन-4 के अंतर्गत ब्राम्हणपारा वार्ड क्रमांक 43 स्थित सोहागा मंदिर में निगम कर्मचारियों द्वारा संपत्तिकर का नोटिस देने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और महापौर ने संबंधित कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। निगम ने इस मामले में मोहर्रिर सुशात और अमर नामक दो कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने नियमों के विपरीत जाकर मंदिर को संपत्तिकर का नोटिस क्यों दिया। महापौर मीनल चौबे ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नाराजगी जताई और कहा कि भविष्य में यदि ऐसी गलती दोहराई गई तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जोन आयुक्तों और राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल — चाहे वह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च हो — को टैक्स नोटिस जारी न किया जाए। महापौर ने यह भी कहा कि निगम प्रशासन जनता की आस्था का सम्मान करता है और धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती है, तो तुरंत नगर निगम को सूचित करें ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके।

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