Kopra Reservoir

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान और बर्ड वॉक आयोजित

रायपुर के कोपरा जलाशय परिसर में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन को लेकर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना और प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम की शुरुआत स्वच्छता अभियान से हुई, जिसमें नागरिकों, स्वयंसेवकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जलाशय परिसर में सफाई कर स्वच्छ और हरित वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प भी लिया। इसके बाद आयोजित बर्ड वॉक में लोगों ने क्षेत्र में मौजूद विभिन्न पक्षियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की अहम भूमिका होती है। साथ ही जैव विविधता और पक्षियों के बीच संबंधों की भी जानकारी साझा की गई। आयोजकों ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम के जरिए लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझाने का प्रयास किया गया।

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कोपरा जलाशय के पास प्रस्तावित स्टील-पावर प्लांट रद्द, कंपनी ने पर्यावरणीय कारणों से आवेदन वापस लिया

बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय के पास प्रस्तावित स्टील और पावर प्लांट परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। IMAEC स्टील एंड पावर लिमिटेड ने इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए दिया गया अपना आवेदन वापस ले लिया है। यह निर्णय पर्यावरणीय कारणों और वन्यजीव प्रेमियों की आपत्तियों के बाद लिया गया। दरअसल, इस परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए गए थे। अधिवक्ता संदीप तिवारी और वाइल्डलाइफ फोटो जर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने रिपोर्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। कंपनी ने 20 अप्रैल 2026 को औपचारिक पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण से अपने आवेदन को निरस्त करने का अनुरोध किया। यह परियोजना बिलासपुर जिले के सकरी क्षेत्र में प्रस्तावित थी, जिसके लिए 24 मार्च 2026 को आवेदन किया गया था। कंपनी ने अपने पत्र में स्वीकार किया कि प्रस्तावित स्थल के पास स्थित कोपरा जलाशय एक संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र है, जिसका पर्यावरणीय महत्व अत्यधिक है। यहां समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है और बड़ी संख्या में पक्षियों का आवागमन होता है। वन विभाग और अन्य एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि इस क्षेत्र में किसी भी औद्योगिक गतिविधि से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने परियोजना को स्वेच्छा से वापस लेने का निर्णय लिया। कंपनी ने यह भी बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के PARIVESH पोर्टल पर जमा किया गया आवेदन भी वापस ले लिया गया है और इस मामले में आगे कोई कार्रवाई न करने का अनुरोध किया गया है। कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में जाना जाता है, जहां 161 प्रजातियों के पक्षियों का आवास है। इनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जो हर साल सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के जरिए यहां पहुंचती हैं। इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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