Food Adulteration

खाने में छिपा ‘स्लो पॉइजन’: गुपचुप पानी से लेकर फलों-सब्जियों तक मिलावट का बड़ा खेल

भीषण गर्मी के इस मौसम में बाजारों में बिकने वाले कई खाद्य पदार्थ आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। जिस गुपचुप के पानी को आप स्वादिष्ट समझकर पीते हैं या जो चमकदार आम आपको आकर्षित करता है, वही आपको बीमार कर सकता है। रायपुर के बाजारों में मुनाफा बढ़ाने के लिए कुछ दुकानदार खुलेआम मिलावटी चीजें बेच रहे हैं। जांच में सामने आया है कि गुपचुप के पानी में प्राकृतिक पुदीना-धनिया की जगह हानिकारक हरे केमिकल मिलाए जा रहे हैं। इसके अलावा गंदे पानी से बनी बर्फ और एक्सपायर्ड ब्रेड भी बेची जा रही है। सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए कॉपर सल्फेट जैसे केमिकल का उपयोग किया जा रहा है, जबकि फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये मिलावटी पदार्थ शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनका असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग ने ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ अभियान के तहत मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 1000 से अधिक दुकानों की जांच की जा चुकी है, जिसमें कई जगहों से खराब मैंगो पल्प, रंग मिले पेय पदार्थ और दूषित गुपचुप पानी जब्त कर नष्ट किया गया। राज्य के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, शहर के कई चाट और गुपचुप स्टॉल की जांच में मिलावट के मामले सामने आए हैं। एक दुकान पर गुपचुप के पानी में हरा रंग मिला पाया गया, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा एक बेकरी से एक्सपायर्ड ब्रेड भी जब्त की गई। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट कई स्तरों पर हो रही है। दूध में पानी, डिटर्जेंट या सिंथेटिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। मसालों में ईंट का चूरा और कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। ठंडे पेय पदार्थों में सस्ते फ्लेवर और कृत्रिम रंग डाले जाते हैं। बर्फ भी कई बार अस्वच्छ पानी से तैयार की जाती है। मसालों में भी भारी मिलावट देखने को मिल रही है। हल्दी में लेड क्रोमेट, मिर्च पाउडर में नकली रंग, शहद में शुगर सिरप और घी में सस्ता तेल मिलाया जा रहा है। यहां तक कि आइसक्रीम में भी सिंथेटिक केमिकल पाए जा रहे हैं। प्रदेश में 27 अप्रैल से 11 मई तक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग बाहर का खाना खाते समय सतर्क रहें और शक होने पर खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें।

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रायपुर में नकली पनीर का बड़ा खुलासा: 1200 किलो जब्त, सेहत के लिए बना ‘धीमा जहर’

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली पनीर बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। भाठागांव स्थित केसरी बगीचा इलाके में संचालित एक फैक्ट्री से करीब 1200 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया गया। इस दौरान मौके से पामFake Dairy Products,ऑयल, दूध पाउडर, एसेटिक एसिड और अन्य रसायन भी बरामद किए गए, जिनसे यह पनीर तैयार किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, इस फैक्ट्री का संचालन आदर्श पराशर द्वारा किया जा रहा था। विभाग को पहले ही नकली पनीर निर्माण की सूचना मिली थी, जिसके बाद रविवार को छापेमारी की योजना बनाई गई। टीम सुबह करीब 11:30 बजे मौके पर पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर पनीर की पैकेजिंग होती मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी फैक्ट्री पर जनवरी 2026 में भी कार्रवाई करते हुए 1700 किलो नकली पनीर जब्त कर नष्ट किया गया था। इसके बावजूद दोबारा इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होना कई सवाल खड़े कर रहा है। कार्रवाई के लिए इस बार रायपुर की टीम को शामिल नहीं किया गया, बल्कि अन्य जिलों जैसे धमतरी, बालोद और बलौदाबाजार से अधिकारियों को बुलाकर अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इसी दौरान उरला क्षेत्र में स्थित एक अन्य डेयरी पर भी छापा मारा गया, जहां गंदगी के बीच पनीर बनाया जा रहा था। वहां से 500 किलो पनीर नष्ट किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री पिछले करीब 6 साल से संचालित हो रही थी, जबकि इसका लाइसेंस हाल ही में 2025 में लिया गया था। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर मध्यप्रदेश के भिंड और मुरैना के बताए जा रहे हैं, जिनके रहने की व्यवस्था भी वहीं की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का मिलावटी पनीर सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसके सेवन से शुरुआत में अपच और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि लंबे समय तक उपयोग करने पर लिवर को गंभीर नुकसान, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार सेवन करने से कुछ ही वर्षों में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी शामिल है।

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