Financial Fraud

रायपुर में मुंशी 10 लाख लेकर फरार, कंपनी का कैश जमा कराने गया था बैंक

राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में एक कारोबारी के साथ विश्वासघात का मामला सामने आया है, जहां कंपनी का मुंशी 10 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़ित विजय गोयल देवेंद्र नगर के निवासी हैं और आयरन एंड स्टील ट्रेडिंग का व्यवसाय करते हैं। उनका कार्यालय स्टेशन रोड स्थित अरिहंत कॉम्प्लेक्स में संचालित होता है। कंपनी के लेन-देन से संबंधित नकदी इकट्ठा कर बैंक में जमा करने की जिम्मेदारी मुंशी अनिल साल्वे को सौंपी गई थी। बताया गया कि अनिल साल्वे विभिन्न पार्टियों से कंपनी के लगभग 10 लाख रुपये लेकर आया, लेकिन रकम बैंक में जमा कराने के बजाय वह फरार हो गया। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटा तो कारोबारी ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद विजय गोयल ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले को गंभीरता से लिया गया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है।

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रायपुर में क्रिप्टो और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 1.35 करोड़ की ठगी

6वीं पास युवक ने 26 लोगों को बनाया शिकार, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार रायपुर में क्रिप्टो करेंसी और शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप भतपहरी के रूप में हुई है, जिसने खुद को शेयर मार्केट एक्सपर्ट बताकर 26 लोगों से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपए से अधिक की ठगी की। मामला मोवा-पंडरी थाना क्षेत्र का है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ लिया। आरोपी की शैक्षणिक योग्यता महज 6वीं तक बताई जा रही है। ऐसे फंसाता था लोगों को पुलिस को दी गई शिकायत में पंडरी निवासी अमित दास ने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान उनकी पहचान देवपुरी निवासी कुलदीप भतपहरी से हुई थी। आरोपी खुद को शेयर मार्केट, IPO, NSE, MSEI और CDSL से जुड़ा निवेश सलाहकार बताता था। उसने “मासिक के.बी. प्लान” के नाम से निवेश योजना बताकर अमित दास और उसके भाई से ऑनलाइन और नकद माध्यम से करीब 15.60 लाख रुपए ले लिए। शुरुआत में कुछ महीनों तक नियमित ब्याज की रकम दी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद कई अन्य लोग भी आरोपी के जाल में फंसते चले गए। दिसंबर 2024 में हुआ फरार दिसंबर 2024 में आरोपी अचानक संपर्क से बाहर हो गया। जब निवेशकों को पैसे वापस नहीं मिले, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पंडरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और लगातार दबिश के जरिए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को एसीसीयू और पंडरी थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने इसी तरीके से कुल 26 लोगों से 1.35 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी से जुड़े लेन-देन और संपर्क के लिए किया जा रहा था। पहले भी जा चुका है जेल पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी कुलदीप भतपहरी इससे पहले भी इसी तरह के ठगी के मामले में थाना टिकरापारा से जेल जा चुका है। पुलिस को आशंका है कि ठगी का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

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रायपुर में बढ़ता साइबर फ्रॉड: निर्दोष लोगों के खातों पर ताला, 50 से ज्यादा पीड़ित परेशान

देशभर में साइबर अपराध का दायरा तेजी से फैलता जा रहा है। ठगों द्वारा ऑनलाइन धोखाधड़ी तो बढ़ ही रही है, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी उन लोगों को झेलनी पड़ रही है जिनके खातों में ठगी की रकम पहुंच जाती है। जैसे ही किसी बैंक अकाउंट में किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की एंट्री दिखाई देती है, पुलिस और बैंक तुरंत खाते पर रोक लगा देते हैं—भले ही खाता धारक का किसी ठगी से कोई लेना-देना न हो। रायपुर में ऐसे 50 से ज्यादा लोग अब भी बैंक, थाने और कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं, क्योंकि उनके खाते सिर्फ 2,000 से 20,000 रुपए की संदिग्ध राशि आने पर सीज कर दिए गए। इन लोगों में व्यापारी, नौकरीपेशा और आम नागरिक शामिल हैं। केस–1: साइबर सेल के मेल के बाद अकाउंट बंद, बैंक भी नहीं बता रहा वजह न्यू राजेंद्र नगर की बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर दिव्या का आरोप है कि उनका ICICI बैंक खाता एक साल पहले बिना किसी सूचना के ब्लॉक कर दिया गया। बैंक ने सिर्फ इतना बताया कि साइबर सेल से मेल आने के बाद यह कार्रवाई की गई है, लेकिन यह मेल किस जिले से आया–इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस से भी मदद नहीं मिली, जिसके बाद दिव्या ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। केस–2: सैलरी अकाउंट फ्रीज, परिवार की भेजी रकम भी नहीं निकाल पा रहीं कोतवाली क्षेत्र की मिक्की (नाम बदला हुआ) बताती हैं कि उनका सैलरी अकाउंट अचानक लॉक हो गया। बैंक ने बताया कि 11,000 रुपए का संदिग्ध अमाउंट आने पर खाता बंद किया गया है। हालांकि बैंक यह नहीं बता पाया कि उन्हें राहत कैसे मिलेगी। खाता बंद होने के कारण वे अपने परिजनों द्वारा भेजा पैसा भी नहीं निकाल पा रही हैं। केस–3: 21 हजार का संदेह, लेकिन फंस गए 20 लाख रुपए से अधिक गंज इलाके के तुषार (नाम परिवर्तित) अपना गारमेंट्स कारोबार चलाते हैं। वे बताते हैं कि फोन-पे और पेटीएम से मिलने वाले रोज़ाना भुगतान उनके बैंक खाते में आते थे, लेकिन पिछले पांच महीनों से खाता सीज है। बैंक का कहना है कि 21,000 रुपए का संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिलने पर पुलिस की ओर से मेल आया और खाता ब्लॉक कर दिया गया। लेकिन मेल भेजने वाला विभाग कौन था—यह जानकारी भी नहीं दी जाती। 50 से अधिक खाते संदिग्ध राशि पर ब्लॉक, लोग उधारी में जीवन चला रहे स्थिति यह है कि खातों के सीज होने से लोग आर्थिक संकट में घिर गए हैं। एडवोकेट की राय: संपूर्ण अकाउंट ब्लॉक करना नियमों के खिलाफ रायपुर के एडवोकेट विपिन अग्रवाल का कहना है कि साइबर ठगी का पैसा कई खातों से घूमकर आता है, और जिस खाते में संदिग्ध राशि पहुंचती है, उसे ‘लीन’ में रखा जा सकता है। लेकिन पूरे खाते को सीज करना नियमों के खिलाफ है, जबकि बैंक अक्सर ऐसा कर रहे हैं।कई मामलों में कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सिर्फ संदिग्ध राशि पर कार्रवाई हो, पूरा खाता ब्लॉक नहीं किया जाए। कैसे पहुंचती है ठगी की रकम दूसरों के खातों तक? ज्यादातर पीड़ित व्यापारी हैं, जिन्होंने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लिया था। जांच में पाया गया कि यह पैसा कई खातों से होकर उनके खाते में पहुंचा था—जिसे पुलिस भाषा में “लेयरिंग” कहा जाता है। लेयर क्या होती है? कानून के अनुसार चौथी लेयर में सिर्फ लीन लगाया जा सकता है, लेकिन अकाउंट सीज करने का प्रावधान नहीं है। निष्कर्ष साइबर ठगी का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन इसकी मार निर्दोष लोगों पर पड़ रही है। बैंक और पुलिस की मौजूदा प्रक्रिया पीड़ितों के लिए भारी परेशानी खड़ी कर रही है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी व्यवस्था बने जिसमें वास्तविक अपराधियों को पकड़ा जाए और निर्दोष लोगों के खाते अनावश्यक रूप से ब्लॉक न किए जाएं।

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उपभोक्ता आयोग के लेखा अधिकारी पर लाखों के गबन का आरोप: 9 साल बाद खुलासा, अधीक्षक की शिकायत पर FIR दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग कार्यालय में पदस्थ एक पूर्व लेखा अधिकारी पर सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। आरोपी अधिकारी ने वर्ष 2017 में विभागीय राशि में हेराफेरी करते हुए लगभग 3 लाख 98 हजार 553 रुपए का गबन किया था। करीब 9 साल बाद इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ, जिसके बाद अब देवेंद्र नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 2017 में किया गया था गबन पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी का नाम विनोद साहू है, जो उस समय राज्य उपभोक्ता आयोग में लेखा प्रभारी के पद पर पदस्थ था।जांच में यह सामने आया कि उसने 7 सितंबर 2017 को विभागीय खातों से रकम निकालकर अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी थी। इस लेन-देन को उसने विभागीय भुगतान के रूप में दर्ज किया था ताकि गड़बड़ी का पता न चले। अधीक्षक की शिकायत पर मामला दर्ज उपभोक्ता आयोग के अधीक्षक जे.आर. निराला ने इस पूरे मामले की शिकायत देवेंद्र नगर थाने में दर्ज कराई। अधीक्षक ने बताया कि जब विभागीय खातों की जांच कराई गई, तब ट्रांजेक्शन में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया, जिसने सभी तथ्यों की पुष्टि की। जांच समिति ने पाई गड़बड़ी सही समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि आरोपी ने कई किश्तों में सरकारी राशि को अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर किया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर अधीक्षक ने आरोपी के खिलाफ अमानत में ख्यानत और धोखाधड़ी (धारा 406, 420 IPC) के तहत कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने अधीक्षक की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल आरोपी की भूमिका और अन्य संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

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