EOW investigation

छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई: दुर्ग-बिलासपुर में बिल्डर और कारोबारियों के ठिकानों पर छापे

छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए दुर्ग और बिलासपुर में कई स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान बिल्डर और कारोबारी से जुड़े ठिकानों पर वित्तीय दस्तावेजों और निवेश की जानकारी खंगाली जा रही है। दुर्ग में ‘अमर इंफ्रा’ से जुड़े कारोबारी और राजनीतिक रूप से सक्रिय चतुर्भुज राठी के घर और कार्यालय में जांच की गई। वहीं भिलाई में गोविंद मंडल के निवास और फैक्ट्री में भी टीम जांच में जुटी रही। दूसरी ओर बिलासपुर में सर्राफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और सदर बाजार स्थित ‘श्री राम ज्वेलर्स’ पर भी ईडी अधिकारियों ने दबिश दी। इस कार्रवाई में 10 से अधिक अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। शराब घोटाले और नेटवर्क की जांचबताया जा रहा है कि यह कार्रवाई शराब घोटाले के फरार आरोपी विकास अग्रवाल से जुड़े नेटवर्क की जांच के सिलसिले में की जा रही है। जांच एजेंसी इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। भारतमाला प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के संकेतजांच के दौरान भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जिन इलाकों से यह प्रोजेक्ट गुजरता है, वहां प्रभावशाली लोगों ने अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी और बाद में उसी का मुआवजा लिया। राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवालइस मामले में पटवारी और राजस्व निरीक्षकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उन्होंने मुआवजा प्रकरण तैयार कर आगे भेजे, जिनके आधार पर भुगतान जारी हुआ। कलेक्टरों तक पहुंची जांचकरीब 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की जांच की जा रही है, जिनमें से कुछ पर कमीशन लेने के आरोप लगे हैं। इसमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग जैसे जिलों के नाम सामने आए हैं। EOW की कार्रवाई और गिरफ्तारियांआर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने पहले ही इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की थी, जिसके बाद कुछ अधिकारियों और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब ईडी उसी केस के आधार पर आगे की जांच कर रही है और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर फोकस कर रही है। राजनीतिक कनेक्शन की भी जांचजांच एजेंसी पूर्व मंत्रियों, विधायकों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। उनके रिश्तेदारों और करीबी लोगों के जरिए पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: आबकारी अधिकारी समेत 59 लोगों की ED कोर्ट में पेशी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जांच में आज ईडी (Enforcement Directorate) की विशेष अदालत में कुल 59 लोग पेश हुए। इन लोगों में आबकारी विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। सुबह से ही कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जमा रही। इससे पहले पिछले तीन दिनों में EOW (Economic Offences Wing) ने दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके ट्रक जब्त किए थे। वहीं, कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में काम करने वाले अकाउंटेंट समेत चार कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए EOW दफ्तर तलब किया गया था। शराब घोटाले की जांच कर रही एजेंसियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की तलाश कर रही हैं, जो कई सालों से फरार हैं। एजेंसियों का मानना है कि उनके दस्तावेज और भूमिका मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। मामला क्या है? EOW ने इस मामले में ACB (Anti-Corruption Bureau) में FIR दर्ज की है। FIR में लगभग 3200 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र है। इसमें राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। ED की जांच में सामने आया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व में सिंडिकेट के जरिए यह घोटाला किया गया। घोटाले की रणनीति घोटाले को तीन श्रेणियों में बांटा गया: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद में 100 रुपए कमीशन लिया गया। इसके लिए शराब की कीमत बढ़ाई गई और ओवर बिलिंग की अनुमति दी गई। B: नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्रीसिंडिकेट ने सरकारी दुकानों में नकली होलोग्राम वाली शराब बेची। इसके लिए खाली बोतलें डिस्टलरी तक पहुंचाने और परिवहन की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उनके भतीजे अमित सिंह को दी गई। शराब बिक्री के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया और दुकानों में बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किया गया। शुरुआत में प्रति पेटी की कीमत 2880 रुपए थी, बाद में इसे 3840 रुपए कर दिया गया। C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया में बदलावदेशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज के क्षेत्र को आठ जोन में बांटा गया। सिंडिकेट ने ज़ोन के आधार पर कमीशन वसूला। तीन वित्तीय वर्षों में डिस्टलरीज ने लगभग 52 करोड़ रुपए C पार्ट के रूप में सिंडिकेट को दिए। अधिकारियों का मानना है कि अब तक मिले साक्ष्य इस घोटाले की गंभीरता को साबित करते हैं और आगे और बड़े खुलासे संभव हैं।

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कस्टम मिलिंग घोटाला: EOW की चार्जशीट में टुटेजा और ढेबर पर गंभीर आरोप, 140 करोड़ की वसूली का खुलासा

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और व्यवसायी अनवर ढेबर के खिलाफ करीब 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2021-22 में हुई थी, जब उद्योग भवन में हुई एक अहम बैठक में अनियमित वसूली की योजना तैयार की गई। 🔹 EOW ने टुटेजा और रोशन चंद्राकर को बताया मास्टरमाइंड चार्जशीट में EOW ने पूर्व IAS अनिल टुटेजा और तत्कालीन अधिकारी रोशन चंद्राकर को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।कहा गया कि टुटेजा ने राइस मिलर्स एसोसिएशन पर दबाव बनाकर मिलर्स से अवैध रूप से वसूली करवाई। इस दौरान नरेश सोमानी को हटाकर चंद्राकर को कोषाध्यक्ष बनाया गया ताकि वसूली का काम आसान हो सके। 🔹 मिलर्स से 140 करोड़ की वसूली EOW का दावा है कि राइस मिलर्स से करीब 140 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। जो व्यापारी पैसे देने से मना करते थे, उनके मिलों पर छापेमारी कराई गई।जांच में सामने आया कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लगभग 22 करोड़ रुपए का कमीशन वसूला, जिसका कुछ हिस्सा कांग्रेस के फंड तक पहुंचा। 🔹 बोरी-कार्टून में जाता था पैसा राजीव भवन चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि अवैध वसूली की रकम बोरी और कार्टून में भरकर कांग्रेस के राजीव भवन भेजी जाती थी।यह पैसा पहले शहर के होटलों — जैसे बीटीआई मैदान, पाम बैलेजियो और बनियान ट्री — में एकत्र किया जाता था और फिर होटल के जरिए टुटेजा तक पहुंचता था। बाद में रकम का बंटवारा किया जाता था। 🔹 सीएम हाउस तक पहुंची योजना EOW की रिपोर्ट के अनुसार, वसूली की योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले मुख्यमंत्री निवास में बैठक हुई थी।इस बैठक में प्रोत्साहन राशि 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया गया।इसके बाद बेबीलॉन होटल में “सम्मान समारोह” के नाम पर वसूली अभियान की शुरुआत हुई। 🔹 कई विभागों में ढेबर का दखल जांच में सामने आया कि अनवर ढेबर का प्रभाव केवल मिलिंग तक सीमित नहीं था। वह PWD, वन विभाग, बिजली विभाग और मार्कफेड जैसे कई सरकारी संस्थानों में सक्रिय था।EOW को मिले चैट रिकॉर्ड बताते हैं कि बिना ढेबर की अनुमति के कई काम आगे नहीं बढ़ते थे। अब इन विभागों में गड़बड़ियों की जांच भी शुरू की गई है। 🔹 शराब कारोबारी सिंघानिया भी शामिल EOW की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि शराब घोटाले के आरोपी सिद्धार्थ सिंघानिया ने भी इस वसूली में बड़ी भूमिका निभाई।ढेबर के निर्देश पर उसने अपने दो एजेंट अंकुर पालीवाल और सूरज पवार के माध्यम से पैसा वसूला, जबकि टुटेजा की ओर से रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी इसका संचालन करते थे। 🔹 आगे की जांच जारी EOW का कहना है कि जांच अभी जारी है और कोर्ट की प्रक्रिया में सभी आरोपियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि आगे की कार्रवाई में और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

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