सिक्किम की अनोखी पहल: बच्चे के जन्म पर 108 पेड़ लगाना अनिवार्य, सरकार देती है जमीन और पौधे

सिक्किम में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां बच्चे के जन्म पर परिवारों को 108 पौधे लगाने होते हैं। खास बात यह है कि लोग इन पौधों की देखभाल अपने बच्चों की तरह कर रहे हैं। पौधों को पानी देना, खाद डालना और उनकी सुरक्षा करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कई परिवार बच्चों का जन्मदिन भी इन पौधों के बीच मनाते हैं। यह पहल सिक्किम सरकार की ‘मेरो रुख, मेरो संतति’ योजना के तहत शुरू की गई है, जिसका अर्थ है “मेरा पेड़, मेरी संतान”। पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे देश की अनोखी सरकारी योजनाओं में से एक माना जा रहा है। योजना के अनुसार, बच्चे के जन्म पर माता-पिता को 108 पौधे लगाने अनिवार्य हैं। जिन परिवारों के पास जमीन उपलब्ध है, वे अपने खेत या निजी भूमि पर पौधे लगाते हैं। वहीं जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें सरकार जमीन और पौधे उपलब्ध कराती है। इन पौधों में फलदार, औषधीय और अन्य उपयोगी प्रजातियां शामिल होती हैं। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है, जबकि सरकार निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी संचालित कर रही है। योजना के तहत पौधरोपण करने वाले परिवारों के बच्चों के नाम पर सरकार 18 वर्षों के लिए 10,800 रुपए की एफडी भी करती है। बच्चे बड़े होने पर इन पेड़ों की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाएगी। सिक्किम में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कम होती हरियाली को देखते हुए फरवरी 2023 में यह योजना शुरू की गई थी। शुरुआत में 100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 108 कर दिया गया, क्योंकि इसे शुभ अंक माना जाता है। अब तक इस योजना के तहत 9,653 परिवारों ने 10.42 लाख से ज्यादा पौधे लगाए हैं। इससे राज्य में हरियाली और वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिल रही है। देश के अन्य राज्यों में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी जन्म और संस्कृति से जुड़े पौधरोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने कहा कि इस योजना से लोग पौधों को परिवार का हिस्सा मानकर उनकी देखभाल कर रहे हैं, जिससे राज्य में हरियाली लगातार बढ़ रही है। वहीं पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक Rakesh Chaturvedi का कहना है कि सरकारी योजनाओं में अक्सर बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते हैं, लेकिन निजी देखभाल के कारण इस योजना में लगभग 90 प्रतिशत पौधे सुरक्षित और जीवित रह रहे हैं।

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