Education News

दुर्ग में LLB फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट पर बवाल: हिंदी में उत्तर लिखने पर फेल करने का आरोप, यूनिवर्सिटी घेरकर छात्रों का विरोध

दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में LLB फर्स्ट सेमेस्टर के खराब परिणाम को लेकर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि लीगल लैंग्वेज विषय में अचानक नियम बदल दिए गए और हिंदी में उत्तर लिखने वाले विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जारी परिणाम के अनुसार 417 छात्रों में से केवल 101 छात्र ही सफल हो पाए हैं। 230 छात्रों को पूरक परीक्षा में रखा गया है, जबकि 77 छात्र पूरी तरह अनुत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में फेल होने का मुख्य कारण केवल एक विषय है। छात्रों ने दावा किया कि पहले इसी विषय में हिंदी में उत्तर लिखने पर भी अंक दिए जाते थे, लेकिन इस बार केवल अंग्रेजी में लिखे उत्तरों का ही मूल्यांकन किया गया, जिसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि बार काउंसिल के नियमों के अनुसार लीगल लैंग्वेज विषय में उत्तर अंग्रेजी में देना अनिवार्य था और उसी आधार पर मूल्यांकन किया गया है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कोई बदलाव किया गया था तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि विद्यार्थी उसी अनुसार तैयारी कर सकें। छात्रों ने मांग की है कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिले हैं उन्हें न्याय दिया जाए। साथ ही पुनर्मूल्यांकन की सुविधा फिर से शुरू करने की भी मांग की गई है। इसी तरह धनरसायन सिंह गुरुल महाविद्यालय में भी परिणाम को लेकर नाराजगी देखी गई, जहां 56 में से 50 छात्रों को एक विषय में पूरक की स्थिति में रखा गया है। छात्रों का कहना है कि चारों संबद्ध कॉलेजों में यही स्थिति बनी है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह परिणाम देर से जारी किया है, जबकि छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद तय समय सीमा के भीतर परिणाम घोषित नहीं किया गया, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया है। अब सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा नजदीक होने से छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

दुर्ग में LLB फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट पर बवाल: हिंदी में उत्तर लिखने पर फेल करने का आरोप, यूनिवर्सिटी घेरकर छात्रों का विरोध Read Post »

Bhilai / Durg, Education, GOVERNMENT

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के आरोप के बाद NTA का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ के 45 हजार छात्र फिर देंगे एग्जाम

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह फैसला पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। अब देशभर के छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। छत्तीसगढ़ में लगभग 45 हजार अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। NTA ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी। नई परीक्षा तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। छत्तीसगढ़ में इस बार NEET परीक्षा के लिए 19 केंद्र बनाए गए थे। इनमें रायपुर के करीब 9,200 छात्र शामिल थे। NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों पर ही री-एग्जाम कराया जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी। जांच में सामने आया है कि पेपर छपने से पहले ही कुछ सवाल कथित नकल गिरोह तक पहुंच गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल पहले ही लीक हो चुके थे। इस मामले के तार राजस्थान के जयपुर से जुड़ रहे हैं। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। एजेंसियां उसके नेटवर्क और अन्य राज्यों में फैले कनेक्शन की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि लीक हुए सवालों को दूसरे प्रश्नों के साथ मिलाकर एक “क्वेश्चन बैंक” तैयार किया गया था, जिसे परीक्षा देने वाले छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और केमिस्ट्री के 45 में से 35 सवाल हूबहू परीक्षा में आए। एजेंसियों ने कई छात्रों से पूछताछ की है। पूछताछ में पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं। NTA के अनुसार, 8 मई से ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है ताकि परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे। राजस्थान में परीक्षा के बाद कई छात्रों के पास हाथ से लिखे गए कथित “गेस पेपर” मिले थे, जिनके सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे। 10 मई को SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर सवालों का मैच होना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। यह पहला मौका नहीं है जब NTA विवादों में आया हो। इससे पहले 2024 में भी NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद में घिरी थी। उस समय बिहार और झारखंड में जांच के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी।

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के आरोप के बाद NTA का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ के 45 हजार छात्र फिर देंगे एग्जाम Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

RTE एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त: 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, सरकार से मांगा जवाब

Chhattisgarh High Court ने प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पहली कक्षा में एडमिशन की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस रिपोर्ट पर हैरानी जताई, जिसमें बताया गया कि राज्य के करीब 400 स्कूलों में RTE के तहत एक भी आवेदन नहीं आया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि 387 स्कूल ऐसे हैं जहां एडमिशन के लिए किसी भी अभिभावक ने आवेदन नहीं किया। वहीं 366 स्कूलों में सीटों के मुकाबले बेहद कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल बताए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते, या फिर कहीं सरकार वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रही। कोर्ट ने राज्य शासन को पूरी जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच ने कहा कि RTE के तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल में सिर्फ एक-दो बच्चों के एडमिशन की जानकारी दी जा रही है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से पूछा कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तब गरीब बच्चों के दाखिले में देरी क्यों हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में RTE के तहत आवंटित सीटों और हुए एडमिशन की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए। साथ ही शिक्षा सचिव को 10 जुलाई तक विस्तृत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

RTE एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त: 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, सरकार से मांगा जवाब Read Post »

Bilaspur, Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT

5वीं-8वीं की परीक्षा पर सवाल: घटिया पेपर से जूझे 7 लाख छात्र, लिखते ही फट रहीं कॉपियां

प्रदेश में बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के कारण विवादों में आ गई हैं। राज्य स्तर से भेजे गए प्रश्नपत्र-सह-उत्तरपुस्तिका की गुणवत्ता बेहद खराब होने से लाखों विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। कागज इतना पतला बताया जा रहा है कि पेन से लिखते ही स्याही दूसरी तरफ दिखने लगती है और हल्का दबाव पड़ते ही पन्ने फट जा रहे हैं। गणित जैसे विषय में रफ वर्क के लिए अलग जगह नहीं दी गई, जबकि सीमित पन्नों में कई प्रश्न शामिल कर दिए गए। कई छात्रों को उत्तर लिखने में कठिनाई हुई। कुछ केंद्रों पर प्रश्न अधूरे या गायब होने की शिकायत भी सामने आई, वहीं रेखा खींचते समय कागज फटने की घटनाएं भी बताई जा रही हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इस परीक्षा में प्रदेशभर के करीब 7 लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा शुल्क भी निर्धारित है—कक्षा 5वीं के लिए 55 रुपये और 8वीं के लिए 60 रुपये प्रति छात्र। निजी स्कूलों में यह शुल्क अभिभावक देते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में खर्च शिक्षा विभाग उठाता है। प्रश्नपत्र, परीक्षा संचालन, कॉपी जांच और परिणाम प्रक्रिया पर कुल मिलाकर लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा सामग्री में कई तकनीकी कमियां भी सामने आईं, जैसे पर्यवेक्षक और छात्रों के हस्ताक्षर के लिए स्थान का अभाव तथा उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त जगह न होना। विशेषज्ञों के अनुसार प्रश्नपत्र के लिए सामान्यतः 60 से 80 GSM और उत्तरपुस्तिका के लिए कम से कम 80 GSM कागज का उपयोग होना चाहिए, लेकिन इस परीक्षा में उपयोग किए गए कागज की गुणवत्ता इससे काफी कम बताई जा रही है। कम GSM वाले कागज में स्याही आर-पार दिखती है और कागज जल्दी फट जाता है। इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5वीं-8वीं की परीक्षा पर सवाल: घटिया पेपर से जूझे 7 लाख छात्र, लिखते ही फट रहीं कॉपियां Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur, State
Scroll to Top