शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल की रिहाई पर सियासत तेज, BJP ने उठाए सवाल, सिंहदेव बोले– बिना दोष सिद्ध किए दी जा रही सजा
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को जमानत मिल जाती है, उसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल ने लखमा की कभी पैरवी नहीं की और कांग्रेस शासनकाल में आदिवासी नेताओं को साजिश के तहत निशाना बनाया गया। ठाकुर ने कहा कि कवासी लखमा के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ मामला गढ़ा गया। अगर जांच निष्पक्ष है, तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल क्यों? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय शराब घोटाले को सत्ता का संरक्षण मिला। सिंहदेव का पलटवार— जांच एजेंसियों का दुरुपयोग वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर बिना अपराध सिद्ध हुए ही लोगों को सजा दे रही है, जो कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सिंहदेव ने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, देवेंद्र यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के कई नेताओं के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। भूपेश बघेल बोले— राजनीतिक बदले की कार्रवाई चैतन्य बघेल की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बेटे की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ED, IT और EOW जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल बदले की भावना से किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि चैतन्य को हाईकोर्ट से जमानत मिलना इस बात का सबूत है कि कार्रवाई गलत थी। उन्होंने बताया कि चैतन्य की रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई, जबकि ED ने जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तारी कर खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। ED के आरोप क्या हैं? ED के मुताबिक शराब घोटाले की जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें चैतन्य बघेल पर करीब 1000 करोड़ रुपए की लेयरिंग और मनी ट्रांजैक्शन का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले की रकम विभिन्न चैनलों से होते हुए चैतन्य बघेल तक पहुंचाई गई। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारियों के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में कई राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज है।

