Durg Triple Murder Case

दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में फांसी की सजा: पत्नी-बेटी की हत्या कर खुद को मृत दिखाने की साजिश बेनकाब

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में वर्ष 2020 के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब छह साल बाद कोर्ट ने आरोपी रवि शर्मा को पत्नी और मासूम बेटी सहित तीन हत्याओं के मामले में मौत की सजा दी है। इस मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने इसे अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखा। पत्नी और बच्ची की हत्या, खुद को मृत दिखाने की साजिशजांच में सामने आया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी व बच्चे राउरकेला में रहते हैं। इसके बावजूद उसने भिलाई में मंजू नामक महिला से दूसरी शादी कर ली। मंजू ने घटना से डेढ़ महीने पहले बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन आरोपी इस बच्चे को नहीं चाहता था। इसी वजह से दोनों के बीच लगातार विवाद होता था। बाद में उसने पत्नी और बच्ची की हत्या की साजिश रच डाली। निर्दोष युवक को बनाया शिकारअपने अपराध को छिपाने के लिए आरोपी ने एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को बहला-फुसलाकर घर बुलाया। शराब में नशीली दवा मिलाकर उसे बेहोश किया और फिर उसकी हत्या कर दी, ताकि शव को अपना बताकर खुद को मृत साबित कर सके। इसके बाद उसने पत्नी को भी नशीला पदार्थ देकर मार डाला और अंत में अपनी मासूम बच्ची की भी हत्या कर दी। गैस ब्लास्ट से सबूत मिटाने की कोशिशहत्या के बाद आरोपी ने पूरे घटनास्थल को जलाकर सबूत खत्म करने की योजना बनाई। उसने गैस सिलेंडर से आग फैलाने की कोशिश की, ताकि यह हादसा लगे, लेकिन उसका प्लान पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। घटनास्थल से मिले अहम सुरागपुलिस को कमरे में लिखी भ्रामक बातें और संदिग्ध परिस्थितियां मिलीं, जिससे मामला संदिग्ध लगा। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी घटना से पहले एक युवक को घर लाते और बाद में अकेले निकलते हुए दिखाई दिया। मोबाइल लोकेशन से यह भी पता चला कि घटना के बाद उसने रायपुर रेलवे स्टेशन से कॉल किया और फरार हो गया। राउरकेला से गिरफ्तारी, पूछताछ में खुलासापुलिस ने आरोपी को राउरकेला रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पूरा अपराध कबूल कर लिया और हत्या की पूरी योजना का खुलासा किया। मजबूत सबूतों के आधार पर सजाजांच के दौरान पुलिस ने हथौड़ा, टेप, मोबाइल, स्कूटी और दवाइयों से जुड़े सबूत बरामद किए। साथ ही हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट और गवाहों के बयान भी आरोपी के खिलाफ गए। सरकारी वकील भावेश कटरे ने अदालत में पक्ष रखा, जबकि मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश कुमार ध्रुव ने पूरी कर चार्जशीट पेश की थी। सभी तथ्यों और सबूतों को देखते हुए अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।

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दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में फांसी की सजा, पत्नी-बेटी की हत्या कर खुद को मृत दिखाने की साजिश नाकाम

छत्तीसगढ़ के Durg जिले के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अदालत ने छह साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि शर्मा को मौत की सजा दी है। यह मामला वर्ष 2020 का है, जिसमें आरोपी ने अपनी पत्नी और डेढ़ महीने की मासूम बच्ची की हत्या कर दी थी। इसके अलावा उसने एक अज्ञात युवक की भी जान ले ली, ताकि खुद को मृत साबित कर सके। जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसका परिवार Rourkela में रहता था। इसके बावजूद उसने भिलाई में मंजू नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली थी। हाल ही में जन्मी बच्ची को लेकर दोनों के बीच विवाद होता रहता था, जिससे तंग आकर आरोपी ने यह खौफनाक साजिश रची। घटना Bhilai के तालपुरी स्थित पारिजात कॉलोनी में 21 जनवरी 2020 को हुई थी। सुबह मंजू की मां को एक संदिग्ध कॉल मिला, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे तो घर अंदर से धुआं निकलता मिला। दरवाजा तोड़ने पर कमरे में मंजू और उसकी बच्ची के जले हुए शव मिले, जबकि एक अन्य युवक का शव भी वहां पड़ा था। शुरुआत में ऐसा लगा कि तीसरा शव आरोपी का है, लेकिन जांच में पता चला कि वह कोई और व्यक्ति था। घटनास्थल पर लिखे संदेश और अन्य सुराग पुलिस को भ्रमित करने के लिए बनाए गए थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, जब्त सामान और गवाहों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। फुटेज में आरोपी एक अज्ञात युवक को घर लाते और घटना के बाद अकेले निकलते दिखाई दिया। बाद में कॉल लोकेशन के आधार पर उसे रेलवे स्टेशन से भागते समय पकड़ा गया और अंततः Rourkela में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसने एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को शराब में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश किया और उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने पत्नी को भी नशीला पदार्थ देकर मार डाला और अंत में अपनी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। साक्ष्य मिटाने के लिए उसने आग लगाकर गैस ब्लास्ट का माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन योजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथौड़ा, टेप, मोबाइल और अन्य सामान जब्त किए। साथ ही हस्तलेख जांच में यह भी पुष्टि हुई कि घटनास्थल पर लिखे गए संदेश आरोपी ने ही लिखे थे। सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए आरोपी को मृत्युदंड सुनाया। इस केस में शासकीय पक्ष की ओर से मजबूत पैरवी और विस्तृत जांच अहम साबित हुई।

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