विधानसभा में नशे के मुद्दे पर सत्तापक्ष में ही सवाल: भाजपा विधायकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए प्रश्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान सत्तारूढ़ दल के ही कई विधायकों ने प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। हालांकि गृह मंत्री ने विभाग पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई का दावा किया। “खुलेआम हो रही बिक्री” भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने कहा कि रायपुर और बिलासपुर समेत कई शहरों में नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि हाल ही में पकड़े गए गांजा पैकेजिंग गिरोह के पास हाईटेक कैमरे मिले, जिनसे उन्हें पुलिस की गतिविधियों की पूर्व जानकारी मिल जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में पुलिस आरक्षक की संलिप्तता सामने आई है, जो गंभीर चिंता का विषय है। गृह मंत्री का जवाब: “रणनीति के तहत कार्रवाई” गृह मंत्री विजय शर्मा ने विभाग के फेल होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। टिकरापारा क्षेत्र में एक आरक्षक के खिलाफ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मामला प्रक्रियाधीन है। मेडिकल स्टोर्स और स्कूलों के पास बिक्री का मुद्दा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि मेडिकल दुकानों से बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के नशीली दवाइयों की बिक्री पर सख्ती जरूरी है। वहीं कुंवर सिंह निषाद ने स्कूलों के आसपास नशे के कारोबार का मुद्दा उठाया। विधायक अटल श्रीवास्तव ने नशा कारोबारियों की संपत्ति राजसात करने की जानकारी दी, जबकि राजेश मूणत ने ड्रग्स की सूचना देने वालों के लिए इनाम योजना की मांग की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि चर्चा दूर तक जाती है तो उसे होने दिया जाए। 📊 कार्रवाई के आंकड़े सरकार का कहना है कि सभी जिलों में टास्क फोर्स बनाकर समन्वित रणनीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर आगे भी बहस तेज रहने के संकेत हैं।


