रायपुर में बढ़ता साइबर फ्रॉड: निर्दोष लोगों के खातों पर ताला, 50 से ज्यादा पीड़ित परेशान
देशभर में साइबर अपराध का दायरा तेजी से फैलता जा रहा है। ठगों द्वारा ऑनलाइन धोखाधड़ी तो बढ़ ही रही है, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी उन लोगों को झेलनी पड़ रही है जिनके खातों में ठगी की रकम पहुंच जाती है। जैसे ही किसी बैंक अकाउंट में किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की एंट्री दिखाई देती है, पुलिस और बैंक तुरंत खाते पर रोक लगा देते हैं—भले ही खाता धारक का किसी ठगी से कोई लेना-देना न हो। रायपुर में ऐसे 50 से ज्यादा लोग अब भी बैंक, थाने और कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं, क्योंकि उनके खाते सिर्फ 2,000 से 20,000 रुपए की संदिग्ध राशि आने पर सीज कर दिए गए। इन लोगों में व्यापारी, नौकरीपेशा और आम नागरिक शामिल हैं। केस–1: साइबर सेल के मेल के बाद अकाउंट बंद, बैंक भी नहीं बता रहा वजह न्यू राजेंद्र नगर की बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर दिव्या का आरोप है कि उनका ICICI बैंक खाता एक साल पहले बिना किसी सूचना के ब्लॉक कर दिया गया। बैंक ने सिर्फ इतना बताया कि साइबर सेल से मेल आने के बाद यह कार्रवाई की गई है, लेकिन यह मेल किस जिले से आया–इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस से भी मदद नहीं मिली, जिसके बाद दिव्या ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। केस–2: सैलरी अकाउंट फ्रीज, परिवार की भेजी रकम भी नहीं निकाल पा रहीं कोतवाली क्षेत्र की मिक्की (नाम बदला हुआ) बताती हैं कि उनका सैलरी अकाउंट अचानक लॉक हो गया। बैंक ने बताया कि 11,000 रुपए का संदिग्ध अमाउंट आने पर खाता बंद किया गया है। हालांकि बैंक यह नहीं बता पाया कि उन्हें राहत कैसे मिलेगी। खाता बंद होने के कारण वे अपने परिजनों द्वारा भेजा पैसा भी नहीं निकाल पा रही हैं। केस–3: 21 हजार का संदेह, लेकिन फंस गए 20 लाख रुपए से अधिक गंज इलाके के तुषार (नाम परिवर्तित) अपना गारमेंट्स कारोबार चलाते हैं। वे बताते हैं कि फोन-पे और पेटीएम से मिलने वाले रोज़ाना भुगतान उनके बैंक खाते में आते थे, लेकिन पिछले पांच महीनों से खाता सीज है। बैंक का कहना है कि 21,000 रुपए का संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिलने पर पुलिस की ओर से मेल आया और खाता ब्लॉक कर दिया गया। लेकिन मेल भेजने वाला विभाग कौन था—यह जानकारी भी नहीं दी जाती। 50 से अधिक खाते संदिग्ध राशि पर ब्लॉक, लोग उधारी में जीवन चला रहे स्थिति यह है कि खातों के सीज होने से लोग आर्थिक संकट में घिर गए हैं। एडवोकेट की राय: संपूर्ण अकाउंट ब्लॉक करना नियमों के खिलाफ रायपुर के एडवोकेट विपिन अग्रवाल का कहना है कि साइबर ठगी का पैसा कई खातों से घूमकर आता है, और जिस खाते में संदिग्ध राशि पहुंचती है, उसे ‘लीन’ में रखा जा सकता है। लेकिन पूरे खाते को सीज करना नियमों के खिलाफ है, जबकि बैंक अक्सर ऐसा कर रहे हैं।कई मामलों में कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सिर्फ संदिग्ध राशि पर कार्रवाई हो, पूरा खाता ब्लॉक नहीं किया जाए। कैसे पहुंचती है ठगी की रकम दूसरों के खातों तक? ज्यादातर पीड़ित व्यापारी हैं, जिन्होंने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लिया था। जांच में पाया गया कि यह पैसा कई खातों से होकर उनके खाते में पहुंचा था—जिसे पुलिस भाषा में “लेयरिंग” कहा जाता है। लेयर क्या होती है? कानून के अनुसार चौथी लेयर में सिर्फ लीन लगाया जा सकता है, लेकिन अकाउंट सीज करने का प्रावधान नहीं है। निष्कर्ष साइबर ठगी का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन इसकी मार निर्दोष लोगों पर पड़ रही है। बैंक और पुलिस की मौजूदा प्रक्रिया पीड़ितों के लिए भारी परेशानी खड़ी कर रही है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी व्यवस्था बने जिसमें वास्तविक अपराधियों को पकड़ा जाए और निर्दोष लोगों के खाते अनावश्यक रूप से ब्लॉक न किए जाएं।
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