विजया रहाटकर बोलीं- धर्मांतरण में भी महिला-उत्पीड़न की आशंका:महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा-महिला अपराधों के लिए एक राज्य जिम्मेदार नहीं

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बुधवार को कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण से जुड़े कई मामलों में महिलाओं के उत्पीड़न की आशंका रहती है, इसलिए आयोग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर जांच करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए किसी एक राज्य को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। हर प्रदेश की स्थिति अलग होती है—कहीं मामले अधिक दर्ज होते हैं, तो कहीं कम रिपोर्टिंग होती है, इसलिए सीधी तुलना उचित नहीं है। हर साल बड़ी संख्या में शिकायतेंरहाटकर ने बताया कि देशभर से हर साल करीब एक लाख शिकायतें राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचती हैं। कई पीड़ित महिलाएं दिल्ली नहीं जा पातीं, इसलिए आयोग की टीमें खुद राज्यों और जिलों में जाकर सुनवाई करती हैं, ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर न्याय मिल सके। 58 मामलों की सुनवाई, मौके पर समाधान नहींआयोग की टीम ने शहर में आयोजित एक शिविर के दौरान महिलाओं से जुड़े 58 मामलों की सुनवाई की। हालांकि, इनमें से किसी भी मामले का तत्काल समाधान नहीं हो पाया। अधिकांश शिकायतों को पुलिस, सखी वन स्टॉप सेंटर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेज दिया गया। सुनवाई के दौरान कई महिलाएं घरेलू विवाद, पति-पत्नी के झगड़े और ससुराल पक्ष की शिकायत लेकर पहुंचीं। वहीं कुछ मामलों में पुलिस के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए। धर्मांतरण और अंधविश्वास पर चिंताअध्यक्ष ने कहा कि धर्मांतरण से जुड़े कुछ मामलों में महिलाओं के शोषण के पहलू सामने आते हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने महिलाओं को अंधविश्वास और तथाकथित बाबाओं से सतर्क रहने की सलाह दी। व्यक्तिगत मामलों में भी हस्तक्षेपसुनवाई के दौरान एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने दूसरी महिला के कारण नौकरी से वीआरएस ले लिया, जिससे परिवार को मिलने वाली सुविधाएं बंद हो गईं। इस पर आयोग ने संबंधित विभाग को पत्र लिखने के निर्देश दिए। एक अन्य मामले में युवती ने राइस मिल संचालक पर निजी फोटो और चैट वायरल कर परेशान करने का आरोप लगाया। आयोग ने पुलिस को आईटी कानून के तहत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। हमले और पुलिस कार्रवाई पर सवालएक महिला कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि उस पर दो बार जानलेवा हमला हुआ, लेकिन पुलिस ने पहले केस दर्ज नहीं किया। बाद में दबाव पड़ने पर कार्रवाई की गई। आयोग ने इस मामले में भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। संवेदनशीलता पर जोररहाटकर ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि समाज की सोच से भी जुड़ी है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया कि महिला मामलों में संवेदनशील रवैया अपनाएं और पीड़ितों को मानसिक व कानूनी सहायता दी जाए। बेटियों को करियर के लिए प्रेरित कियाकार्यक्रम के दौरान आयोजित वर्कशॉप में छात्राओं को डिफेंस और प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। डिजिटल और AI ट्रेनिंग पर जोरमहिलाओं को ‘यशोदा AI’ जैसे डिजिटल टूल्स की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने उत्पादों की मार्केटिंग और डिजाइन खुद कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। प्री-मैरिटल काउंसिलिंग का सुझावकलेक्ट्रेट में हुई बैठक में अध्यक्ष ने ‘तेरे मेरे सपने’ योजना के तहत शादी से पहले काउंसिलिंग सेंटर खोलने का सुझाव दिया, जिससे वैवाहिक विवादों को पहले ही कम किया जा सके।

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