CBI investigation

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के आरोप के बाद NTA का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ के 45 हजार छात्र फिर देंगे एग्जाम

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह फैसला पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। अब देशभर के छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। छत्तीसगढ़ में लगभग 45 हजार अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। NTA ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी। नई परीक्षा तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। छत्तीसगढ़ में इस बार NEET परीक्षा के लिए 19 केंद्र बनाए गए थे। इनमें रायपुर के करीब 9,200 छात्र शामिल थे। NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों पर ही री-एग्जाम कराया जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी। जांच में सामने आया है कि पेपर छपने से पहले ही कुछ सवाल कथित नकल गिरोह तक पहुंच गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल पहले ही लीक हो चुके थे। इस मामले के तार राजस्थान के जयपुर से जुड़ रहे हैं। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। एजेंसियां उसके नेटवर्क और अन्य राज्यों में फैले कनेक्शन की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि लीक हुए सवालों को दूसरे प्रश्नों के साथ मिलाकर एक “क्वेश्चन बैंक” तैयार किया गया था, जिसे परीक्षा देने वाले छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और केमिस्ट्री के 45 में से 35 सवाल हूबहू परीक्षा में आए। एजेंसियों ने कई छात्रों से पूछताछ की है। पूछताछ में पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं। NTA के अनुसार, 8 मई से ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है ताकि परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे। राजस्थान में परीक्षा के बाद कई छात्रों के पास हाथ से लिखे गए कथित “गेस पेपर” मिले थे, जिनके सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे। 10 मई को SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर सवालों का मैच होना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। यह पहला मौका नहीं है जब NTA विवादों में आया हो। इससे पहले 2024 में भी NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद में घिरी थी। उस समय बिहार और झारखंड में जांच के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी।

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बिरनपुर हिंसा का ट्रायल शुरू: CBI चार्जशीट में पुलिस पर पत्थरबाजी और भुनेश्वर साहू पर हमला का खुलासा

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर हिंसा मामले में करीब दो साल बाद आज से ट्रायल की शुरुआत हो रही है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 8, 9 और 10 अक्टूबर को गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस केस में मृतक भुनेश्वर साहू के पिता और भाजपा विधायक ईश्वर साहू समेत कुल 23 गवाहों को पेश किया जाएगा। CBI ने नवंबर 2024 में चार्जशीट पेश की थी और इसमें किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है। भुनेश्वर साहू पर हमला और पुलिस पर पथरावCBI की जांच में सामने आया कि भीड़ ने भुनेश्वर साहू पर जानलेवा हमला किया और पुलिस अफसरों पर भी पत्थरबाजी की। चार्जशीट के अनुसार, थाना साजा के सब-इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर मौके पर पहुंचे और भुनेश्वर को छुड़ाने की कोशिश की। तभी भीड़ में से आवाज आई, “मुख्तार, अकबर, जनाब, जलील-पुलिस को पत्थर मारो।” इस दौरान अफसरों पर भी पत्थर फेंका गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अब्दास मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने पत्थर, ईंट और चाकू से हमला किया। भीड़ ने भुनेश्वर को पकड़कर मस्जिद के पास की गली में ले जाकर बेरहमी से पीटा और पत्थर-ईंट से वार किया। गंभीर स्थिति में उसके माता-पिता ने उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर साजा पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया। घटना की शुरुआतCBI के अनुसार, 8 अप्रैल 2023 को बच्चों के बीच साइकिल टकराने के विवाद ने बड़ी घटना को जन्म दिया। स्कूल से लौटते समय चंचल साहू और सलीम खान के बीच झगड़ा हुआ। इसके बाद मारपीट और बोतल फेंकने के दौरान कुलेश्वर साहू घायल हो गया। दोपहर में पंचायत बुलाई गई, जिसमें मुस्लिम समुदाय की भीड़ ने ईंट-पत्थर और हथियारों से हमला किया। अफरा-तफरी में कई लोग घायल हुए और भुनेश्वर को मस्जिद की ओर घसीटा गया। आरोपी और गिरफ्तारीप्रारंभिक जांच में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। बाद में CBI ने 6 और नाम जोड़े। अब कुल 18 आरोपी हैं। नए आरोपी पुलिस पर पथराव करने के दोषी हैं। हिंसा के बाद धारा 144 लागू कर दी गई थी। दो दिन बाद बिरनपुर गांव में रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की लाश मिली, जिसके बाद दोबारा तनाव बढ़ा। 8 लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। राजनीतिक पक्ष से निष्कर्षबचाव पक्ष के वकील एस के फरहान ने बताया कि CBI और पुलिस की जांच में पाया गया कि बच्चों के झगड़े के बाद हिंसा भड़क गई थी। चार्जशीट में किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया।

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छत्तीसगढ़ NGO घोटाला: CBI ने तेज की जांच, 14 लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग से जुड़ा बहुचर्चित NGO घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। सोमवार को CBI अधिकारियों ने मना स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पर दबिश दी और स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) से जुड़े दस्तावेज मांगे। अधिकारियों ने NGO से संबंधित तीन बंडल फाइलों की फोटो कॉपी भी अपने कब्जे में ली है। CBI ने साफ किया है कि इन दस्तावेजों की जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस केस में एक पूर्व मंत्री, सात IAS अफसर और कई राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों के नाम जांच के घेरे में हैं। कैसे बना था NGO और कौन थे संस्थापक 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह के साथ कई शीर्ष अफसरों — जैसे रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, MK राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, BL अग्रवाल, सतीश पांडे और पीपी श्रोती — ने मिलकर दो NGO की स्थापना की थी। दिव्यांगों की मदद के नाम पर बने इन संगठनों का उद्देश्य व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल और सुनने की मशीनें बांटना था, लेकिन हकीकत में यह काम केवल कागजों पर ही हुआ। बिना मान्यता और बिना चुनाव के चला NGO यह NGO समाज कल्याण विभाग से कभी मान्यता प्राप्त नहीं कर सका, फिर भी राज्य और केंद्र की योजनाओं के तहत इसे करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी NGO का सदस्य नहीं हो सकता, लेकिन मंत्री और अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर संगठन बना लिया। न चुनाव हुआ, न प्रबंधकारिणी की बैठक, न ही 17 साल तक कोई ऑडिट। कैसे खुला घोटाले का राज 2016 में इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब संविदा कर्मचारी कुंदन ठाकुर ने अपनी नौकरी रेगुलर करवाने के लिए आवेदन किया। उन्हें पता चला कि वे पहले से ही एक अन्य पद पर पदस्थ हैं और उनके नाम से दूसरी जगह से वेतन जारी हो रहा है। RTI लगाने पर खुलासा हुआ कि उनके जैसे कई कर्मचारी हैं जिनके नाम पर दो-दो जगह से वेतन लिया जा रहा है। फर्जी नियुक्तियां और डबल सैलरी का खेल जांच में सामने आया कि कई कर्मचारियों को कागजों में पदस्थ दिखाया गया, जबकि वे जमीन पर काम ही नहीं कर रहे थे। कुछ कर्मचारियों के नाम से 2 से 3 जगहों से सैलरी निकाली जाती रही। सिर्फ पांच साल में लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये फर्जी नियुक्तियों के जरिए खर्च दिखाए गए। जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने डॉ. कमलप्रीत सिंह को जांच सौंपी थी। रिपोर्ट में पाया गया कि 2004 से अब तक NGO का एक भी ऑडिट नहीं हुआ। फर्जी नियुक्तियां की गईं और कर्मचारियों को नकद में भुगतान किया गया।सरकार ने अदालत में यह तर्क दिया कि केंद्र भौतिक रूप से संचालित था और वहां कृत्रिम अंग लगाए गए, लेकिन भुगतानों में पारदर्शिता नहीं रही। अब CBI की नजर बड़े नामों पर CBI अब उन अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों पर फोकस कर रही है जिनके दस्तखत फंड ट्रांसफर फाइलों में मिले हैं। साथ ही जिला स्तर के अफसर, ऑडिट रोकने वाले अधिकारी और फर्जी सैलरी पाने वाले नाम भी जांच की जद में हैं। 15 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जांच आगे बढ़ने पर और कई बड़े नाम बेनकाब होने की संभावना है।

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