September 2025

रायपुर : हिंदी दिवस पर सर्वेक्षण ने खोली छात्रों की कमजोरियां

45% छात्रों को नहीं पता कब मनाते हैं हिंदी दिवस, ‘हिन्दुस्तान’ तक सही नहीं लिख पाए रायपुर में हिंदी दिवस के मौके पर किए गए एक सर्वेक्षण ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। दैनिक भास्कर टीम ने राजधानी के 100 छात्रों (50 उच्चतर माध्यमिक और 50 कॉलेज स्टूडेंट्स) से हिंदी भाषा पर उनकी राय जानने के लिए 3 प्रश्न पूछे— इसके लिए छात्रों को आधा घंटा समय दिया गया। गलतियां और सोच लेख लिखने के दौरान कई छात्रों ने ‘हिन्दुस्तान’, ‘संवैधानिक’, ‘विकसित’, ‘वासियों’, ‘प्रतीक’, ‘जीवन’ जैसे आम शब्द भी गलत लिखे। 45% छात्रों को यह तक नहीं पता था कि हिंदी दिवस कब मनाया जाता है। कई स्टूडेंट्स ने लिखा कि हिंदी बोलने पर लोगों को “अनपढ़” समझा जाता है और इससे नौकरी के अवसर कम हो जाते हैं। उच्चतर माध्यमिक के 50 में से सिर्फ 10 छात्रों ने हिंदी को ‘राजभाषा’ लिखा, बाकी ने इसे ‘राष्ट्रभाषा’ बताया। कॉलेज के 50 में से 22 छात्र हिंदी की कोई कविता नहीं लिख पाए। छात्रों की राय स्कूल के छात्रों के लेख से पांच मुख्य बिंदु सामने आए— अधिकतर कॉलेज स्टूडेंट्स ने भी माना कि अंग्रेजी बोलने वालों को समाज में ज्यादा प्रतिष्ठा और अवसर मिलते हैं, यही कारण है कि घर वाले उन्हें अंग्रेजी माध्यम स्कूल भेजते हैं। कविता लिखने में भी कमजोरी उच्चतर माध्यमिक के 50 में से केवल 19 छात्र (38.4%) ही कविता लिख पाए। कॉलेज में यह आंकड़ा 27 (53%) रहा। हालांकि, जिन छात्रों ने कविता लिखी, उनमें भी कईयों को कवि का नाम याद नहीं था। विशेषज्ञों की राय हिंदी पढ़ाने वाली शिक्षिका किरण तिवारी ने कहा कि बच्चों का व्याकरण कमजोर है और वे हिंदी से दूर भाग रहे हैं। यह पूरी तरह बच्चों की गलती नहीं है। वे सोचते हिंदी में हैं, लेकिन अंग्रेजी सीखने का दबाव इतना बढ़ गया है कि वे हिंदी से कटते जा रहे हैं। शिक्षिका अनामिका तिवारी ने कहा कि हिंदी को पाठ्यक्रमों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे बच्चे अपनी ही भाषा से दूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत हिंदी लिखने की आदत ने भी बच्चों की शुद्ध हिंदी बिगाड़ दी है।

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रायपुर में ‘न्यूड पार्टी’ विवाद – 40 हज़ार एंट्री फीस, 21 युवक-युवती रजिस्टर्ड

रायपुर में सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘न्यूड पार्टी’ के पोस्टर्स ने सनसनी फैला दी है। अलग-अलग नामों से चल रहे इन पोस्टर्स में युवाओं को बिना कपड़ों के पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया गया था। शनिवार को यह पोस्टर कांग्रेस नेताओं और हिंदू संगठनों तक पहुंचने के बाद मामला तूल पकड़ गया। नेताओं ने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की। पुलिस जांच में सामने आया कि भाठागांव स्थित एक फार्महाउस में 21 सितंबर की शाम 4 बजे से देर रात 3 बजे तक यह ‘न्यूड पार्टी’ आयोजित की जानी थी, जहां नशीले पदार्थ भी परोसे जाने की तैयारी थी। इस मामले में तेलीबांधा थाने में दो एफआईआर दर्ज की गईं—एक ‘न्यूड पार्टी’ आयोजकों पर और दूसरी ‘स्ट्रेंजर पूल पार्टी’ आयोजकों के खिलाफ। छह लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से एक आरोपी मंत्री का करीबी बताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह आरोपी पहले भी एक बड़े घोटाले में फंस चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी युवक ‘अपरिचित क्लब’ नाम से अलग-अलग फार्महाउस, रिसॉर्ट और क्लब में ऐसे इवेंट आयोजित करते थे। एफआईआर के बाद ‘न्यूड पार्टी’ को रद्द कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण पर राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने पुलिस अधीक्षक और साइबर सेल प्रमुख से 2 दिन में रिपोर्ट मांगी है। ‘न्यूड पार्टी’ क्या है? पश्चिमी देशों में ‘न्यूड पार्टी’ या ‘न्यूडिस्ट इवेंट्स’ आम हैं। इनका उद्देश्य शरीर के प्रति झिझक खत्म करना और समान विचारधारा वाले लोगों के बीच रहना होता है। यूरोप-अमेरिका में न्यूडिस्ट बीच और रिसॉर्ट कानूनी हैं। भारत में कानूनी व सांस्कृतिक कारणों से सार्वजनिक रूप से ऐसे आयोजनों की अनुमति नहीं है, फिर भी गुपचुप आयोजन की खबरें आती रहती हैं। रायपुर में क्यों मचा हंगामा इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘न्यूड पार्टी’, ‘स्ट्रेंजर पार्टी’ और ‘हाउस पूल पार्टी’ के नाम से इवेंट्स के पोस्टर तेजी से वायरल हुए। इनमें तारीख, समय और 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को आमंत्रण जैसी जानकारी भी थी। कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पहले ही इन पोस्टर्स में शराब और ड्रग्स का संकेत था, अब नग्नता का लालच देकर युवाओं को फंसाने की कोशिश सामने आई है। एंट्री फीस और गुप्त आयोजन पुलिस के मुताबिक, पूल पार्टी के बाद चुने हुए मेहमानों के लिए अलग क्लोज्ड पार्टी आयोजित होती थी। यह पार्टी रात 1 बजे से सुबह 6 बजे तक चलती थी, जिसमें एंट्री फीस 40 हजार रुपए और कपल एंट्री 1 लाख रुपए तय थी। यहां कमरों की व्यवस्था भी होती थी। इन पार्टियों में हेरोइन और एमडीएमए जैसे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। ‘स्ट्रेंजर पार्टी’ की एंट्री फीस 2 से 5 हजार रुपए थी, जिसमें खाने-पीने की अलग व्यवस्था थी और शराब व हुक्का की कीमत अलग से वसूली जाती थी। पार्टी में 110 लोगों के शामिल होने की तैयारी थी। 10 दिन पहले शुरू किया प्रमोशन आयोजकों ने 10 दिन पहले सोशल मीडिया पर ‘न्यूड पार्टी’ का प्रमोशन शुरू किया था। इवेंट से जुड़ी आईडी अब डिलीट कर दी गई है। अभी तक 21 युवक-युवतियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा लिया था, जबकि 24 से अधिक लोग लोकेशन मिलते ही रजिस्ट्रेशन कराने की तैयारी में थे। फिलहाल पुलिस आगे की जांच कर रही है और महिला आयोग ने सख्त रिपोर्ट मांगी है।

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